वक़्त के साथ ख़ुद को बदलना सीख लो
सच्चाई का जुनूं है तो बेहतर अकेले चलना सीख लोज़िंदगी इबादत की आग है बेख़ौफ़ जलना सीख लोगुजर चुके लम्हों में दिल की धड़कनें ना क़ैद हो जायेंज़िंदा हो तो वक़्त के साथ ख़ुद को बदलना सीख लो
ना तुम रुकना चाहते हो ना हमे ठहरने का शौक़ है मगरकहीं तो ये क़ाफ़िला रुकेगा एक दिन आहिस्ता आहिस्ताभला कब तक रहेगी आसमाँ में रोशनी की चकाचौंधकभी ना कभी तो दिन ढल जाएगा, आहिस्ता आहिस्ता
ये ज़िद किस काम की अब उतर के आ जाओ जमीं परएक खूबसूरत शाम की तरह तुम भी ढलना सीख लोज़िंदा हो तो वक़्त के साथ ख़ुद को बदलना सीख लो
वक़्त के सैलाब में बिखरते रिश्तों की अहमियत देख लीदरवाज़ा खटखटाने वालों की नीयत देख लीगले में उतरते नमकीन आंसू तो कभी दिखायी नहीं देतेमगर दिखने वाली मुस्कुराहटों की असलियत देख ली
इससे पहले कि दफ़्न हो जाएं जज़्बात इन चहार दीवारियों मेंदुनिया तुम्हारी है ऐ दोस्त, घर से बाहर निकलना सीख लोज़िंदा हो तो वक़्त के साथ ख़ुद को बदलना सीख लो
आख़िर ये तक़दीर बदलने की इतनी जद्दोज़हद क्या हैख़ुद से पूछो तो कभी तुम्हारे जुनूं की आख़िर हद क्या हैबड़े नसीब से मिलती है इस रूह को इंसान की ज़िंदगीकिसी को इल्म नहीं की इन साँसों का मक़सद क्या हैना ठोकरें कम होंगी ना ही कारवाँ रुकेगा तुम्हारी ख़ातिरमायूस होने से बेहतर है अब ख़ुद ही संभलना सीख लोज़िंदा हो तो वक़्त के साथ ख़ुद को बदलना सीख लो
- Rakesh

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